पश्चिम देशों में समाजशास्त्र का उद्भव एवं विकास (growth and development of sociology in the west)

व्यक्ति अपने जन्म से ही जिज्ञासु प्रवृत्ति का रहा है| इस जिज्ञासु प्रवृत्ति के कारण उसमें प्रारंभ से ही अपने समय में प्रचलित विभिन्न प्रकार की सामाजिक ,आर्थिक और राजनीतिक समस्याओं को समझने एवं उनके निवारण का प्रयास किया है |अरस्तु की पुस्तक पॉलिटिक्स, प्लेटो की पुस्तक रिपब्लिक तथा कौटिल्य का अर्थशास्त्र आदि ऐसे ग्रंथ हैं जिनमें समाज के विभिन्न पहलुओं की चर्चा की गई है |इससे पता चलता है कि सामाजिक पहलुओं के अध्ययन की एक लंबी परंपरा रही है फिर भी समाजशास्त्र विषय का एक संस्थागत विषय के रूप में उद्धव एवं विकास 19वीं शताब्दी में हुआ|
समाजशास्त्र का व्यवस्थित रूप से  उद्भव एवं विकास फ्रांस में माना जाता है |वहां के समाजशास्त्री अगस्त काम्टे ने सर्वप्रथम 1838 ईसवी में अपनी पुस्तक प्रत्यक्षवादी दर्शन का मार्ग(course de philosophic positive) मैं समाजशास्त्र शब्द का प्रयोग किया उनका विचार था कि कोई भी विषय ऐसा नहीं है जो कि समाज के विभिन्न पहलुओं का समग्र रूप से अध्ययन कर सकता हो इस कमी को दूर करने के लिए इन्होंने इस नवीन विषय का निर्माण किया| 19वीं शताब्दी  मैं समाजशास्त्र को यद्यपि निश्चय आत्मक विज्ञान माना गया है जिसका प्रारंभ प्राकृतिक विज्ञान के समान था फिर भी यह इतिहास के दर्शन एवं जैविक सिद्धांतों के प्रभाव के कारण उद्विकासवादी था साथ ही इसमें मनुष्य के संपूर्ण जीवन एवं संपूर्ण इतिहास से संबंधित अध्ययन किए जाते थे अर्थात इसकी प्रकृति विश्वकोश थी|
वैज्ञानिक समाजशास्त्र के शैशवअवस्था में इसका पालन पोषण फ्रांस के दुर्खीम ,लीप्ले,रूसो, माउंटेन , हालबॉक्स और मास के हाथों में हुआ| यूं तो इन सभी समाज शास्त्रियों का समाजशास्त्र के क्षेत्र में योगदान है| परंतु फ्रांस में समाजशास्त्र की  नीव डालने का श्रेय यदि  कामटे को जाता है , तो इस विज्ञान की संरचना को दृढ़ बनाने का काम दुर्खीम ने ही किया| दुर्खीम का एक उद्देश्य समाजशास्त्र को स्वतंत्र विज्ञान के रूप में प्रतिष्ठित करना तथा उसे विशेष तौर से दर्शन से अलग करना था|
फ्रांस के पश्चात अमेरिका में समाजशास्त्र का अध्ययन कार्य सर्वप्रथम 1876 ईस्वी में येल विश्वविद्यालय से प्रारंभ हुआ और इस विषय का सर्वाधिक विकास अमेरिका में ही हुआ है| अमेरिकी समाज शास्त्रियों में समनर, रास, सोरोकिन , मैकाइवर एंड पेज, यंग ,लुंडबर्ग, मर्टन ,किंग्सले डेविस, नीमकाफ, पारसंस आदि प्रमुख  हैं|
इंग्लैंड मैं समाजशास्त्र के प्रारंभिक विकास में मील, स्पेंसर, बकल आदि का विशेष योगदान है| बाद के समाजशास्त्रियों में पैट्रिक,वेस्टरमार्क, मैंरेट, कार  सांडर्स नाम विशेष उल्लेखनीय है इन सभी विचार को ने इंग्लैंड में समाजशास्त्र के अध्ययन अध्यापन के क्रमबद्ध प्रचार एवं प्रसार में योगदान दिया|
जर्मनी में टानीज, रेजल ,कार्ल मार्क्स ,हीगल ,मैक्स वेबर ,वीरकांत ,जॉर्ज सिमेल, सेलर आदि समाज शास्त्रियों ने समाजशास्त्र के विकास में काफी योगदान दिया और समाजशास्त्रीय ज्ञान को अपने महत्वपूर्ण सिद्धांतों से सींचा है| मैक्स वेबर के महत्वपूर्ण योगदान सामाजिक क्रिया का सिद्धांत ,प्राधिकार की अवधारणा, नौकरशाही की अवधारणा तथा आदर्श प्रारूप की अवधारणा हैं मैक्स वेबर के अनुसार समाजशास्त्र सामाजिक क्रिया का वृहद विज्ञान है| मैक्स वेबर के अनुसार राज्य प्राधिकार का सर्वप्रमुख रूप है जिसे निश्चित प्रदेश के अंदर शारीरिक बल के वैध प्रयोग का एकाधिकार प्राप्त है |
फ्रांस ,इंग्लैंड, जर्मनी एवं अन्य यूरोपीय देशों में जिस समाजशास्त्र का उद्भव व विकास हुआ है उसे यूरोपीय समाजशास्त्र के नाम से पुकारा जाता है
आज यद्यपि फ्रांस अमेरिका इंग्लैंड में जर्मनी में समाजशास्त्र एक सर्वाधिक लोकप्रिय विषय है ,फिर भी संसार में शायद ही कोई ऐसा देश है जिसमें आज समाजशास्त्र का अध्ययन हो रहा हो|
उपरोक्त विवरण से स्पष्ट होता है कि समाजशास्त्र समाज व सामाजिक संबंधों का अध्ययन करने वाला एक सामाजिक विज्ञान है तथा इसका  व्यवस्थित उद्भव 19वीं शताब्दी से हुआ है और आज भी इसका निरंतर विकास हो रहा है|

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