कोरोना वायरस का प्रभाव( कविता)
सीखा न पाया जिसको रामदेव भी,,,,,
योग सीख रहे हैं वह हर नर नार ,,,,,,,,,,
कोरोना के प्रभाव से,,,,,,,
कर न पाय जो अधिनियम भी,,,,,,,
वह खेत खलियान नदी तालाब साफ एवं स्वच्छ हैं कोरोना के प्रभाव से,,,,,,,,,,,,
जो नहीं रुकता था एक क्षण भी अपने घर पर,,,,,
वह रुका हुआ है घर पर महीनों से,,,,,,,,,,
कोरोना के प्रभाव से,,,,,,,,,,,
जो सालों साल नहीं जाता था अपने मूल निवास पर,,,,, वह जा रहा है भूखा प्यासा पैदल अपने मूल निवास को कोरोना के प्रभाव से, ,,,,,,,,,,,
जिसने कभी उपहास किया था,,,,,,,
कृषि आधारित अर्थव्यवस्था का,,,,,,,,
उसे आज देख रहा हूं मजबूरी में,,,,,,,,
मजदूरी करते कृषि अर्थव्यवस्था की, ,,,,
कोरोना के प्रभाव से, ,,,,,,,,
जो पसंद नहीं करता था संयुक्त परिवार को,,,,,,,
वह भाग रहा है आज मजबूर मे,,,,,,,,,
संयुक्त परिवार में रहने को,,,,,,,
कोरोना के प्रभाव से,,,,,,,
जिसने कभी नहीं दिया महत्व साफ-सफाई को ,,,,,,,,,,
उसे देख रहा हूं दिन में बीस बार हाथ साफ करते हुए, ,
कोरोना के प्रभाव से, ,,,,,,
जहां सुनता था घंटियों एवं अजान की आवाज ,,,,,,,
उन मंदिर मस्जिद मैं आज सूनापन है,,,,,,,,
कोरोना के प्रभाव से, ,,,,,,,,,
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