विद्यालय पर कोरोना का प्रभाव

खुशनुमा माहौल विद्यालयों  मे रहता था,,,
चहल पहल बच्चों की जहां सुनती थी,,,,,
घंटी की आवाज पर बच्चे दौड़े-दौड़े ,,,,,
प्रार्थना स्थल पर पहुंचते,,,,,,
प्रार्थना के सुरों से शिक्षा का वरदान जहां मिलता,,,,,,
शिक्षकों की डांट फटकार,मार्गदर्शन से ,,,,,
शिक्षा का खजाना मिलता था,,,,,
घर के लिए शिक्षक देता था होमवर्क, ,,,,,,,,,,, 
कैसे प्रकृति पर्यावरण नाराज हुई मानव से, ,,,,
न विद्यालयों में चहल पहल ,,,,,
न घंटियों की आवाज,न दौड़ भाग बच्चों और शिक्षकों की,,,,,,,
न प्रार्थना के सुंदर सुरीले सूर कानों में,
शिक्षा के खजाने से वंचित बच्चे बच्चे, ,,,
संकेत दे रही प्रकृति,सुधर जा पृथ्वी के मानव,,,,,,
नित लगा पेड़ पौधे,रख साफ स्वच्छ पर्यावरण
मत बहा अमृत रूपी पानी को,समझ बूंद बूंद पानी की कीमत,,,,,,
पृथ्वी के मानव सुधर जा,कोरोना भी भागेगा
लौटेगी चहल पहल शिक्षा के मंदिर में, गूंजेगे कानों में सुरीले शुरू प्रार्थना घंटी  के
हौसलों के साथ आशा को रख जिंदा
फिर लूटेगा शिक्षा का खजाना शिक्षा के मंदिर में
आओ मैं भी रखूं तुम भी रखो,,
ध्यान प्रकृति को साफ एवं स्वच्छ रखने का,,
डॉक्टर देवेंद्र कुमार नागर
ग्रेटर नोएडा

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