भारत में समाजशास्त्र के अध्ययन की आवश्यकता
इसका उद्देश्य समाजशास्त्र के खोजे हुए ज्ञान का उपयोग मानव जीवन की समस्याओं के निवारण व समाधान में करना है जो मुख्य रूप से निम्न प्रकार के हैं:-
1-भारत में व्याप्त क्षेत्रवाद, भाषावाद ,संप्रदायवाद, जातिवाद, आतंकवाद, रिश्वतखोरी आदि समस्याओं को व्यवस्थित ढंग से सुलझाने के लिए समाजशास्त्रीय अध्ययन आवश्यक है
2- दूसरे समाजों के साथ तुलनात्मक अध्ययन करने के लिए समाजशास्त्र का अध्ययन आवश्यक है|
3- सामाजिक गतिशीलता के बारे में पता लगाने के लिए के लिए समाजशास्त्र का अध्ययन आवश्यक है| 4-अपराधियों के सुधार संबंधी क्षेत्र में अध्ययन के लिए 5-समाज संबंधी ज्ञान तथा उसके आयोजन के लिए समाजशास्त्र का अध्ययन अनिवार्य है |
6-समाजशास्त्र व्यक्ति के विकास में संस्थाओं के स्थान का अध्ययन करता है सामाजिक समस्याओं को हल करने के लिए समाजशास्त्र का अध्ययन बहुत ही महत्वपूर्ण है|
7- समाज का वैज्ञानिक अध्ययन करने के लिए| समाजशास्त्र का अध्ययन बहुत अधिक जरूरी है| 8-समाज में मनुष्य के वास्तविक महत्व तथा उसके सम्मान की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए|
9- मानव संस्कृति को समृद्ध बनाने के लिए समाजशास्त्र का अध्ययन अति आवश्यक है
10- पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव के कारण भारतीय समाज मैं तीव्र गति से परिवर्तन हो रहा है इसके परिणामों का अध्ययन करने के लिए
11- सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में समाज कल्याण अधिकारी ,बाल कल्याण अधिकारी, ग्राम कल्याण अधिकारी, हरिजन कल्याण अधिकारी ,कबीले कल्याण के रूप में
12-अनाथ आश्रमों में लोगों के आने के कारणों तथा उसका निदान करने के रूप में
14- राजनैतिक दलों में बढ़ती भ्रष्टाचार की स्थिति का अध्ययन करने के रूप में
Comments
Post a Comment