गांवों की उपेक्षा क्यों???

भारतवर्ष गांवों का देश कहा जाता है लगभग 70% आबादी गांवों में निवास करती हैगांव के निवासी  अधिकतर कृषि एवं पशुपालन  व्यवसाय पर  निर्भर रहते हैं भारतीय संस्कृति की बात जब आती है तो गांवों का ही जिगर आता है कि यदि भारत की संस्कृति और उसकी गरिमा को गांवों  में ही देखा जा सकता है  महात्मा गांधी जी कहते थे  की  गांवों में  देश की आत्मा निवास करती हैं उनका  सपना था कि गांव का सर्वांगीण विकास हो  लेकिन  देश को लगभग 70 साल आजाद हुए हो गए हैं आजादी से पहले और आजादी के बाद इन 70 सालों में  विशेष तौर पर कुछ नहीं बदला है वही बदहाल गांव और गांव के निवासी देखने को मिलते हैं  वहीं कच्चे रास्ते,बेरोजगार नौजवानों की फौज, शिक्षण संस्थाओं का अभाव, प्राथमिक स्तर की चिकित्सा का अभाव, पीने के साफ पानी का अभाव, रोशनी के लिए बिजली का अभाव, पानी के निकासी उचित व्यवस्था का अभाव, गांव की जमीनों पर बैंकों  के द्वारा ऋण उपलब्ध ने कराना,सरकारी यातायात के साधनों का अभाव खेल के मैदानों का अभाव खुली सरकारी जीमो का अभाव घर से निकलने वाले कूड़े कचरे के निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं

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