मित्र पर कविता
मित्र है विश्वास का खजाना,
त्याग एवं प्यार लुटाने वाला,,
जो भाई नहीं,भाई से बढ़कर हो ,,
वह मित्र कहलाता,,,,,
गलत होने पर गलत बता कर साथ निभाता,,,
दुख सुख में कंधे से कंधा लगाकर साथ खड़ा
पीठ पीछे बुराई न करें न सुने मित्र है वह
आपकी गलतियों में सुधार करें
नित्य आपकी तरक्की की दुआ करें
छोटी-छोटी बातों पर नाराज न हो
दुखी होने पर आपके मनोबल एवं हौसले को गिरने ना दें मित्र है वह
मान सम्मान बढ़ाता,आदर सत्कार करता,
आपके परिवार में घुला मिला मित्र है वह
दूर रहने पर भी आपके पास रहने का एहसास दिलाए आपकी तरक्की से चेहरे पर खुशी के बादल उमड़े
सहनशीलता अनुशासन का पाठ पढ़ाए मित्र है वह
गरीब,मजदूर,जरूरतमंद की मदद के लिए प्रेरित करे
अच्छी सलाह बिना मांगे दे
घूम घूम कर अच्छा सस्ता एवं टिकाऊ सामान दिलाने मैं मदद करें मित्र है वह
आपके कुशल क्षेम की समय-समय पर खबर ले
आप के दर्द की दवा हो,,,, हमदर्द की मिसाल हो
लोगों के लिए सकारात्मक उदाहरण हो मित्र ऐसा हो आओ मिलकर हम भी बने,तुम भी बनो
ऐसे मित्रता का उदाहरण
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