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*UPSC इंटरव्यू में पूछा जाने वाला* *ऐसा सवाल जिसका उत्तर बहुत कम अभ्यर्थी दे पाते हैं**स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस में झंडा* *फहराने में क्या अंतर है ? तो आवो जाने,,,,,**#पहला_अंतर**15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर झंडे को नीचे से रस्सी द्वारा खींच कर ऊपर ले जाया जाता है,*फिर खोल कर फहराया जाता है*जिसे *ध्वजारोहण कहा जाता है *क्योंकि यह 15 अगस्त 1947 की ऐतिहासिक घटना को सम्मान देने हेतु किया जाता है जब प्रधानमंत्री जी ने ऐसा किया था।*संविधान में इसे अंग्रेजी में Flag Hoisting (ध्वजारोहण) कहा जाता है।**जबकि**26 जनवरी गणतंत्र दिवस के अवसर पर झंडा ऊपर ही बंधा रहता है,*जिसे खोल कर फहराया जाता है,*संविधान में इसे Flag Unfurling (झंडा फहराना) कहा जाता है।**#दूसरा_अंतर**15 अगस्त के दिन प्रधानमंत्री जो कि केंद्र सरकार के प्रमुख होते हैं वो ध्वजारोहण करते हैं,*क्योंकि स्वतंत्रता के दिन भारत का संविधान लागू नहीं हुआ था और राष्ट्रपति जो कि राष्ट्र के संवैधानिक प्रमुख होते है*उन्होंने पदभार ग्रहण नहीं किया था। *इस दिन शाम को राष्ट्रपति अपना सन्देश राष्ट्र के नाम देते हैं।**जबकि**26 जनवरी जो कि देश में संविधान लागू होने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, इस दिन संवैधानिक प्रमुख राष्ट्रपति झंडा फहराते हैं**#तीसरा_अंतर**स्वतंत्रता दिवस के दिन लाल किले से *ध्वजारोहण किया जाता है।**जबकि**गणतंत्र दिवस के दिन राजपथ पर झंडा फहराया जाता है।**आपसे आग्रह है ये अंतर अपने बच्चों को जरूर बताएं। वंदे मातरम ! 🇮🇳👏*

डॉ देवेंद्र कुमार नागर की प्रोफाइल

डॉक्टर देवेंद्र कुमार नागर दुजाना गौतम बुध नगर के मध्यम वर्गीय किसान परिवार से आते हैं इन्होंने अपनी शिक्षा किताबों और अन्य साधनों के अभाव में न पूरी की वरन पीएचडी तक प्राप्त की आज भी शिक्षा की अलख जगाए  हुए हैं और भावी पीढ़ियों और आसपास के बच्चों के लिए पुस्तक व पुस्तकालय जैसी सुविधाओं के लिए संकल्प बद्ध होकर लोगों के घरों में पुरानी या प्रयोग में न रही पुस्तकों को आदान प्रदान करने के लिए जन जागरूकता अभियान चलाए हुए हैं जिसके परिणाम भी हम सबके सामने आने लगे हैं अब तक लगभग 13000 जरूरतमंद बच्चों को लगभग 52000 पुस्तकें देकर उनका मनोबल ही नहीं बढ़ाया बल्कि पर्यावरण संरक्षण जिसमें बहुत बड़ी संख्या में पेड़ों को कटने से बचाया तथा जल संरक्षण को भी बढ़ावा दिया| डॉक्टर देवेंद्र कुमार नागर का संकल्प है कि वह अपने जीवन की अंतिम सांस तक पुस्तकों के आदान-प्रदान और जल संरक्षण के लिए स्वयं को संकल्प  बद्ध किए हुए हैं|

शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम,आँधीयों से कह दो कि औक़ात में रहें..!!!

शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम, आँधीयों से कह दो कि औक़ात में रहें..!!!

khani

जंगल में शेर शेरनी शिकार के लिये दूर तक गये अपने बच्चों को अकेला छोडकर। जब देर तक नही लौटे तो बच्चे भूख से छटपटाने लगे.  उसी समय एक बकरी आई उसे दया आई और उन बच्चों को दूध पिलाया फिर बच्चे मस्ती करने लगे. तभी शेर शेरनी आये. बकरी को देख लाल पीले होकर शेर हमला करता,  उससे पहले बच्चों ने कहा इसने हमें दूध पिलाकर बड़ा उपकार किया है नही तो हम मर जाते। अब शेर खुश हुआ और कृतज्ञता के भाव से बोला हम तुम्हारा उपकार कभी नही भूलेंगे, जाओ आजादी के साथ जंगल मे घूमो फिरो मौज करो। अब बकरी जंगल में निर्भयता के साथ रहने लगी यहाँ तक कि शेर के पीठ पर बैठकर भी कभी कभी पेडो के पत्ते खाती थी। यह दृश्य चील ने देखा तो हैरानी से बकरी को पूछा तब उसे पता चला कि उपकार का कितना महत्व है। चील ने यह सोचकर कि एक प्रयोग मैं भी करती हूँ,  चूहों के छोटे छोटे बच्चे दलदल मे फंसे थे निकलने का प्रयास करते पर कोशिश बेकार । चील ने उनको पकड पकड कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया. बच्चे भीगे थे सर्दी से कांप रहे थे तब चील ने अपने पंखों में छुपाया, बच्चों को बेहद राहत मिली. काफी समय बाद चील उडकर जाने लगी तो हैरान हो उठी च...

नशा मुक्ति समाज के लिए जागरूकता अभियान

नशा मुक्ति समाज के लिए जागरूकता अभियान चलाकर लिख रहे हैं नया अध्याय उम्मीद संस्था के संस्थापक एवं संयोजक डॉक्टर देवेंद्र कुमार नागर बताते हैं कि क्षेत्र में जब से जमीनों का मुआवजा मिलने लगा है युवाओं का रुझान नशे की तरफ होने लगा था डॉक्टर देवेंद्र कुमार नागर ने गांव में चौपाल लगाकर अब तक हजारों युवाओं को नशे की गिरफ्त से मुक्त करा चुके हैं अब वह युवा उम्मीद संस्था के सदस्य बनकर गुर्जर समाज को नशा मुक्त समाज बनाने की मुहिम में लगे हुए हैं उम्मीद संस्था से जुड़े प्रधानाचार्य जागेश कुमार जी से बात होती हैं तो वह बताते हैं कि उम्मीद संस्था विद्यालयों में जाकर बच्चों को नशे से होने वाली बीमारियों के विषय में बताते हैं और जीवन में नशा न करने के लिए सभी को शपथ दिलाते हैं उम्मीद संस्था लगभग पिछले15 वर्षों से विद्यालयों तथा गांव में अभियान के माध्यम से एक लाख लोगों को नशा न करने की शपथ दिला चुके हैं अभियान का क्षेत्र में असर यह है कि युवा नशा छोड़ कर शिक्षा के क्षेत्र में परचम लहरा रहे हैं डॉक्टर देवेंद्र कुमार नागर बताते हैं बच्चों को व्यस्त रखने के उद्देश्य से गांव में 15 वर्ष पहले 50 बच्चों ...

स्वास्थ्य दिवस

* स्वास्थ्य दिवस :*  याद रखने योग्य महत्वपूर्ण बातें:  1. बीपी: 120/80  2. पल्स: 70 - 100  3. तापमान: 36.8 - 37  4. सांस : 12-16  5. हीमोग्लोबिन: पुरुष -13.50-18  स्त्री- 11.50 - 16   6. कोलेस्ट्रॉल: 130 - 200  7. पोटेशियम: 3.50 - 5  8. सोडियम: 135 - 145  9. ट्राइग्लिसराइड्स: 220  10. शरीर में खून की मात्रा: पीसीवी 30-40%  11. शुगर लेवल: बच्चों के लिए (70-130) वयस्क: 70 - 115  12. आयरन: 8-15 मिलीग्राम  13. श्वेत रक्त कोशिकाएं WBC:  4000 - 11000  14. प्लेटलेट्स: 1,50,000 - 4,00,000  15. लाल रक्त कोशिकाएं RBC: 4.50 - 6 मिलियन.  16. कैल्शियम: 8.6 -10.3 मिलीग्राम/डीएल  17. विटामिन D3: 20 - 50 एनजी/एमएल. 18. विटामिन B12:  200 - 900 पीजी/एमएल. *वरिष्ठ यानि 40/ 50/ 60 वर्ष  वालों के लिए विशेष टिप्स:* *1- पहला सुझाव:* प्यास न लगे या जरूरत न हो तो भी हमेशा पानी पिएं, सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्याएं और उनमें से ज्यादातर शरीर में पानी की कमी से होती हैं। 2 लीटर न्यूनतम प्रति दिन. *2- दूस...

बच्चों के शैक्षिक स्तर में गुणात्मक वृद्धि कैसे करें

बच्चों के शैक्षिक स्तर में गुणात्मक वृद्धि कैसे करें?  डॉक्टर देवेंद्र कुमार गुर्जर (दुजाना) संस्थापक एवं संयोजक उम्मीद संस्था बच्चा जब पैदा होता हैतो वह कोरी स्लेट के समान होते हैं |समाज में रहकर ही वह सब कुछ सीखते हैं |समाज में रहकर ही उसे अच्छे एवं बुरे का ज्ञान होता है| बच्चा लगभग 4 वर्ष तक सबसे अधिक अपने परिवार से ही सीखता है| उसके बाद वह पास पड़ोस के बच्चों से सीखने को मिलता है| लगभग 4 वर्ष के बाद उसके स्कूलिंग शिक्षा प्रारंभ होती है|यहीं से उसका संपर्क अपनी कक्षा के छात्रों ,विद्यालय के छात्रों ,अध्यापकों तथा अन्य लोगों के साथ होता है|लगभग टीनएज तक बच्चों को अपने अच्छे या बुरे का विशेष ज्ञान नहीं होता है| वह अपने माता-पिता तथा परिवार के लोगों की तुलना में अपने मित्र मंडली की बातों का अधिक अनुसरण करते हैं|इस स्तर पर आकर अभिभावकों को अपने बच्चों के प्रति अधिक सजग रहने की आवश्यकता होती है|क्या अभिभावकों के दिमाग में  अपने बच्चों के प्रति इस प्रकार के प्रशन कभी आते हैं? वह किसके साथ खेलता है?किसके साथ घूमता है?कक्षा में उसके कैसे मित्र हैं? वह क्या पढ़ रहा है?उसके अध्यापक उ...