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दिव्यांगों और वरिष्ठ नागरिक

वृद्ध महिला पुरुष तथा दिव्यांगों के लिए किए गए कार्यों का विवरण पिछले 10 वर्षों से वरिष्ठ महिला-पुरुष तथा दिव्यांग नागरिकों को सहायक उपकरण जैसे छड़ी, कान की मशीन, आंखों के चश्मे, कमर व घुटने की गर्म पत्तियां, पोर्ट चेयर, व्हीलचेयर एवं इलेक्ट्रिक स्कूटी उपलब्ध करा रहे हैं। अपनी आय का 10% हिस्सा नियमित रूप से वरिष्ठ महिला-पुरुष एवं दिव्यांग नागरिकों के सहायक उपकरण दिलाने में सहयोग के लिए समर्पित करते हैं। प्रत्येक रविवार और अवकाश के दिन वरिष्ठ नागरिकों तथा दिव्यांगों की सेवा और सहयोग को समर्पित करते हैं। वरिष्ठ महिला-पुरुष तथा दिव्यांगों को समाज कल्याण विभाग से पेंशन दिलाने में आवश्यक दस्तावेज तैयार कराने और प्रक्रिया पूरी कराने में सहयोग करते हैं। वृद्ध व दिव्यांग नागरिकों को उनकी आय प्रमाण पत्र एवं UDID कार्ड बनाने के लिए प्रेरित करते हैं और सहयोग प्रदान करते हैं। समय-समय पर वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों को सम्मानित कर उनका मनोबल बढ़ाते हैं और समाज में उनकी गरिमा को स्थापित करते हैं। वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों के स्वास्थ्य की दृष्टि से स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर उन्हें निशुल्क दवाइया...

--🌍 "जनसंख्या का कोहराम" 🌍

🌍 "जनसंख्या का कोहराम" 🌍 बढ़ती जनसंख्या ने मचाया चारों ओर कोहराम, धरती बोली – "अब तो समझो, कब करोगे आराम?" पेड़ कटे, जंगल उजड़े, जल भी हुआ बीमार, प्रकृति रोई, बोली – "अब तो थम जाओ मेरे यार!" रोज़ नए मकान बनते, खेत हुए वीरान, जीवनदायिनी मिट्टी भी अब लगे करे हाहाकार। सांस लेना हो रहा मुश्किल, प्रदूषण फैले चारों ओर, जनसंख्या की इस बाढ़ में, थर्राया है हर एक छोर। स्कूल भरे हैं बच्चों से, रोज़गार की कमी बड़ी, भविष्य की नींव लड़खड़ाए, उम्मीदें गईं झड़ी-झड़ी। पानी कम, खाना घटा, संसाधन भी कहें “बस!”, फिर भी मानव न सुधरे, बढ़ती जनसंख्या का उल्लास। अब भी समय है सोचो, लो एक सशक्त प्रण, शिक्षा, जागरूकता से ही मिलेगा सबको जीवन धन। संयम से रचो समाज को, दो धरती को आराम, वरना यही जनसंख्या ले आएगी सर्वनाश का नाम।

अक्षर ज्ञान पाठशाला गाजियाबाद

मैं किसी कार्य से बाहर जा रही थी, तभी मेरी नजर कुछ झुग्गी-झोपड़ियों की ओर पड़ी। वहां छोटे-छोटे बच्चे इधर-उधर घूम रहे थे। उनके मैले-कुचैले और फटे पुराने कपड़े, नंगे पैर, और कुछ के हाथों में कटोरे देख मन भीतर तक हिल गया। वे शायद भीख मांगने जा रहे थे। मेरा कदम वहीं रुक गया, और मन ने कहा—इन बच्चों को किताबों से जोड़ो, इन्हें अक्षरों की उड़ान दो। राजनगर एक्सटेंशन निवासी अध्यक्ष सुनहरी दिशा चैरिटेबल ट्रस्ट ज्योति तोमर बताती है कि मेरे मन में उन बच्चों को शिक्षित करने का विचार आया  मैं अपने सहयोगी उम्मीद संस्था के संस्थापक डॉ. देवेंद्र कुमार नागर से संपर्क किया, जो पहले से ही जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए समर्पित हैं। हमने मिलकर उन बच्चों के अभिभावकों से संपर्क किया और और बच्चों को शिक्षा देने के विचार से उन्हें अवगत कराया वह बहुत ही खुश हुए वहीं पर अक्षर ज्ञान पाठशाला की नींव रख दी। ज्योति तोमर बताती हैं कि अपनी पॉकेट मनी से तथा सहयोगी डॉक्टर देवेंद्र कुमार नागर अपनी सैलरी का कुछ हिस्सा से बच्चों के लिए कॉपियाँ, किताबें, पेन-पेंसिल खरीदीं। धीरे-धीरे बच्चे पढ़ाई में रुचि लेने लगे। भावन...

निशुल्क पुस्तक बैंक के बिंदु

यह एक अद्भुत पहल है जो शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान कर रही है। एनसीआर के 20 निशुल्क बुक बैंकों द्वारा 2 लाख पुरानी पुस्तकों का संग्रह और 16,000 जरूरतमंद बच्चों तक शिक्षा का पहुंचाना एक सराहनीय कार्य है। इस पहल के मुख्य बिंदु हैं: - *पुरानी पुस्तकों का संग्रह*: एनसीआर के बुक बैंकों ने लोगों के घरों से 2 लाख पुरानी पुस्तकें इकट्ठा की हैं ¹। - *शिक्षा का उजाला*: इन पुस्तकों के माध्यम से 16,000 जरूरतमंद बच्चों के जीवन में शिक्षा का उजाला फैलाया गया है। - *बच्चा गोद लेने की पहल*: खुशी के मौकों पर लोगों को एक बच्चा शिक्षा के लिए गोद लेने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। - *सफलता*: अब तक 200 बच्चों को गोद लिया जा चुका है। - *व्हाट्सएप ग्रुप*: 900 लोग व्हाट्सएप ग्रुप में घरों से पुरानी पुस्तक बुक बैंक में एकत्रित करते हैं। - *पुरानी पुस्तकों का प्रभाव*: 90% से अधिक अंक  पुरानी पुस्तकों के बल पर लगभग 2000 बच्चे ला चुके हैं #. पुस्तक एक्सचेंज प्रोग्राम इस कार्यक्रम के तहत आर्थिक रूप से सक्षम लोगों को अपनी पुरानी पुस्तक एक्सचेंज करने के लिए प्रेरित किया गया। इस पहल से अब तक लगभग 8000...

दुजाना लाइब्रेरी का जन्म

गाँव के युवाओं ने अपनी तनखवा खर्च कर दिया लाइब्रेरी को जन्म : डॉ देवेंद्र कुमार नागर बहुत से गाँवों से बड़े - बड़े पदों पर इस देश के नो जवान इस देश की सेवा कर रहे है ऐसे बहुत से गाँव है जाह ना तो बिजली ना लाइब्रेरी ओर ना किसी इन्स्टिटूट की व्यवस्था है , ओर उस तरह का माहोल दखने के बाद भी वहाँ के युवा साथी आगे निकलकर आते है ओर अपनी मेहनत ओर लगन से अपने गाँव ओर क्षेत्र ओर पूरे देश का नाम रोशन करते है इन गाँवों में से एक  गाँव ग्रेटर नॉएडा क्षेत्र में दुजाना भी है जहाँ अब से कुछ समय पूर्व शिक्षा से सम्बंधित कुछ ज़्यादा व्यवस्था उपलब्ध नही थी दुजाना गांव के कुछ शिक्षित नोजवान साथियों ने इस पर विचार किया ओर उन्होंने यह निर्णय लिया की हम छह: से सात लोगों का एक समूह बनाते है ओर अपनी हर महीने की तनखवा का कुछ हिस्सा गाँव के शिक्षा के सम्बन्ध में खर्च करेंगे , फिर इन्होंने 2007 में लाइब्रेरी लाइब्रेरी को जन्म दिया और इस महान सोच ओर कार्य को अंजाम देने वाले ग्राम दूजाना निवासी वरिष्ठ अधिवक्ता ओमवीर आर्य जी मुख्य सम्पादक दैनिक फ़्यूचर लाइन टाइम्स , अधिवक्ता राजकुमार आर्य जी जिला कार्यवाह ,मां.व...

14. निशुल्क पुस्तक बैंक के माध्यम से क्षेत्र मे लोगों के घरों में उपयोगी रद्दी पुस्तकों लगभग प्रतिवर्ष 90000 पुस्तकों को पुस्तक बैंक में हजारों लोगों के सहयोग से जमा कर जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा को बढ़ावा देने के साथ-साथ पुस्तकों के निर्माण में प्रत्येक वर्ष लाखों करोड़ों लीटर पानी की बर्बादी को बचाना क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है तथा प्रत्येक वर्षविभिन्न लोगों के सहयोग से वृक्षारोपण कर जल संरक्षण की दिशा में प्रयास किया जा रहा है

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5. क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों के बच्चों तथा अध्यापकों को सामूहिक भागीदारी के द्वारा जल संरक्षण के लिए चुना गया जिनके द्वारा प्रत्येक वर्ष लगभग 10000 पौधे लगाई गई और इन बच्चों से प्रेरित होकर गौतम बुद्ध नगर से सटे जिलों में भी बच्चों ने बड़े स्तर पर पौधारोपण कर जल संरक्षण में अहम भूमिका निभा रहे हैं लगभग प्रत्येक वर्ष 5000 बच्चों को  जल संरक्षण पर रैली, पोस्ट प्रतियोगिता, डिबेट, निबंध के माध्यम से बच्चों में जल संरक्षण का बीज अंकुरित करने का प्रयास चल रहा है जिसके परिणाम सकारात्मक मूर्त तथा अमूर्त देखने को मिल रहे हैं बच्चों के द्वारा घर पर जाकर अपने परिवार जनों को जल संरक्षण के लिए प्रेरित किया जा रहा है इस प्रकार एक बच्चे के द्वारा लगभग पांच परिवार जनों को जल संरक्षण करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं इस प्रकार बच्चों तथा उनके परिवार जनों को मिलाकर प्रत्येक वर्ष 25000 लोग जल संरक्षण के लिए प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से डॉक्टर देवेंद्र कुमार नागर के द्वारा प्रेरित किया जा रहे हैं गौतम बुध नगर के भूगर्भ जल विभाग के साथ मिलकर सोसाइटियों तथा गांव में चौपाल के द्वारा लगभग प्रत्येक व...

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5. क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों के बच्चों तथा अध्यापकों को सामूहिक भागीदारी के द्वारा जल संरक्षण के लिए चुना गया जिनके द्वारा प्रत्येक वर्ष लगभग 10000 पौधे लगाई गई और इन बच्चों से प्रेरित होकर गौतम बुद्ध नगर से सटे जिलों में भी बच्चों ने बड़े स्तर पर पौधारोपण कर जल संरक्षण में अहम भूमिका निभा रहे हैं लगभग प्रत्येक वर्ष 5000 बच्चों को  जल संरक्षण पर रैली, पोस्ट प्रतियोगिता, डिबेट, निबंध के माध्यम से बच्चों में जल संरक्षण का बीज अंकुरित करने का प्रयास चल रहा है जिसके परिणाम सकारात्मक मूर्त तथा अमूर्त देखने को मिल रहे हैं बच्चों के द्वारा घर पर जाकर अपने परिवार जनों को जल संरक्षण के लिए प्रेरित किया जा रहा है इस प्रकार एक बच्चे के द्वारा लगभग पांच परिवार जनों को जल संरक्षण करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं इस प्रकार बच्चों तथा उनके परिवार जनों को मिलाकर प्रत्येक वर्ष 25000 लोग जल संरक्षण के लिए प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से डॉक्टर देवेंद्र कुमार नागर के द्वारा प्रेरित किया जा रहे हैं गौतम बुध नगर के भूगर्भ जल विभाग के साथ मिलकर सोसाइटियों तथा गांव में चौपाल के द्वारा लगभग प्रत्येक व...

5.replicability

5. क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों के बच्चों तथा अध्यापकों को सामूहिक भागीदारी के द्वारा जल संरक्षण के लिए चुना गया जिनके द्वारा प्रत्येक वर्ष लगभग 10000 पौधे लगाई गई और इन बच्चों से प्रेरित होकर गौतम बुद्ध नगर से सटे जिलों में भी बच्चों ने बड़े स्तर पर पौधारोपण कर जल संरक्षण में अहम भूमिका निभा रहे हैं लगभग प्रत्येक वर्ष 5000 बच्चों को  जल संरक्षण पर रैली, पोस्ट प्रतियोगिता, डिबेट, निबंध के माध्यम से बच्चों में जल संरक्षण का बीज अंकुरित करने का प्रयास चल रहा है जिसके परिणाम सकारात्मक मूर्त तथा अमूर्त देखने को मिल रहे हैं बच्चों के द्वारा घर पर जाकर अपने परिवार जनों को जल संरक्षण के लिए प्रेरित किया जा रहा है इस प्रकार एक बच्चे के द्वारा लगभग पांच परिवार जनों को जल संरक्षण करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं इस प्रकार बच्चों तथा उनके परिवार जनों को मिलाकर प्रत्येक वर्ष 25000 लोग जल संरक्षण के लिए प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से डॉक्टर देवेंद्र कुमार नागर के द्वारा प्रेरित किया जा रहे हैं गौतम बुध नगर के भूगर्भ जल विभाग के साथ मिलकर सोसाइटियों तथा गांव में चौपाल के द्वारा लगभग प्रत्येक व...

4.adoptability the soulation for water conservation should be cost effective adapability amongst the mass

जल संरक्षण के जो समाधान डॉ देवेंद्र कुमार  नागर के द्वारा अपनाई गई वह जनता के बीच बहुत ही सरल लाभकारी सिद्ध हो रहे हैं जो निम्न प्रकार हैं:- 1. बहुत बड़े स्तर पर विद्यालयों, विश्वविद्यालय के युवा विद्यार्थियों के साथ मिलकर वृक्षारोपण और भविष्य के लिए वृक्षारोपण के प्रति विद्यार्थियों में एक जुनून पैदा किया जा रहा है जो जल संरक्षण में एक मील का पत्थर साबित होगा 2. वन विभाग के सहयोग से प्रत्येक वर्ष बड़ी मात्रा में वृक्षारोपण कर गिरते भूजल स्टार में भविष्य में काफी अच्छे परिणाम देखने को मिलेंगे 3 तालाबों तथा पोखरों को सरकारी मशीनरी के साथ पुन जीवित करना जो वर्षा जल को भूमि मैं रिचार्ज करने के बहुत बड़े और पुराने स्रोत हैं 4. निशुल्क पुस्तक बैंक जिसमें बड़े स्तर पर पुरानी पुस्तकों को जरूरतमंद बच्चों के लिए लगातार उपयोग में लाकर पुस्तकों के निर्माण में खर्च होने वाले पानी को बचाकर जल संरक्षण की दिशा में एक बड़ा काम किया जा रहा है 5. घरों में लोगों के द्वारा पानी की कम खपत करने की अच्छी आदत का विकास लगातार क्षेत्र में देखने को मिल रहा है लोगों में रैली पोस्ट प्रतियोगिता दौड़ प्रतियोगिता...

3.Tangibl benefite:- the benefites of action or innovations must have brought out singnificant and tangible result in water conservation

लगातार जल संरक्षण अभियान से क्षेत्र की आम लोगों के जीवन में महत्वपूर्ण और ठोस परिणाम देखने को मिल रहे हैं जो निम्न प्रकार हैं 1. लोगों के घरों में पुरानी पुस्तकों को रद्दी में न बेकार उन्हें निशुल्क पुस्तक बैंक में जमा करने के लिए बड़े स्तर पर जागरूक अभियान चलाया गया जिसका परिणाम यह रहा की इन पुस्तकों के द्वारा पिछले गत वर्षो में क्षेत्र के लगभग 13000 बच्चों को निशुल्क शिक्षा प्राप्त करने में सहायता मिली तथा पुस्तकों के निर्माण में होने वाले लाखों करोड़ों लीटर पानी की बचत हुई 2. बरसात के पानी को सोकता,  वाटर हार्वेस्टिंग ,तालाबोंऔर पोखर के द्वारा भूमि को रिचार्ज करने में मदद मिली 3. घरों में पानी के कम उपयोग से पानी को  फिल्टर करने, गरम करने, समरसेबल चलने मैं ऊर्जा की बचत होती है जिससे आम व्यक्ति को आर्थिक मदद हो रही है तथा वातावरण मैं अधिक पानी रह रहा है  4. जागरूकता अभियान के कारण अधिकतर किसान कम पानी की आवश्यकता वाली फसलों को उगने से किसान की मेहनत और पानी का कम उपयोग होने से  किसान आर्थिक रूप से मजबूत हुए हैं और उनके जीवन में खुशहाली आ रही है 5. आने वाली पीढ़ी के...

2.sustainability of action:- the individual must be making efforts for a long duration to create a sustainable difference

क्षेत्र में लगातार गिरते भूमिगत जल स्तर को देखकर डॉ देवेंद्र कुमार नागर ने 2014 मैं अपने आप से  बूंद बूंद पानी बचाने का सकारात्मक प्रयास किया उनको देखकर उनके घर के लोग भी पानी की कीमत को समझने लगे धीरे-धीरे डॉ देवेंद्र कुमार नागर आज पड़ोस के लोगों को भी लगातार गौतम बुध नगर में गिरते भूमिगत जल के स्तर पर चिंता व्यक्त करने लगे इसका प्रभाव यह रहा की आस पड़ोस के लोग भी पहले यदि उदाहरण के तौर पर नहाने मैं ही लगभग समरसेबल से 100 लीटर पानी की खपत करते थे वह भी अब डॉक्टर देवेंद्र कुमार नागर की प्रेरणा से में केवल बाल्टी और जग की सहायता से 10 लीटर पानी नहाने में खर्च करने लगे इससे डॉक्टर देवेंद्र कुमार नागर का हौसला इतना बड़ा की वह आसपास के गांव मैं जल चौपाल लगाकर लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने लगे लोग इसे जुड़ते गए और डॉक्टर देवेंद्र कुमार नागर गौतम बुध नगर के विद्यालयों और विश्वविद्यालय, सोसाइटी, कस्बा, नगर पालिका, विभिन्न सामाजिक संस्थाओं तथा भूगर्भ जल विभाग गौतम बुद्ध नगर के सहयोग से जल चौपाल, रैली , पोस्टर प्रतियोगिता, के द्वारा बड़े स्तर पर नवयुवकों, बड़े बुजुर्गों तथा महिला...

The individual through his actions or innovation,must have created a positive impact and awareness in larger section or society twards water conservation

क्षेत्र में लगातार गिरते भूमिगत जल स्तर को देखकर डॉ देवेंद्र कुमार नागर ने 2014 मैं अपने आप से  बूंद बूंद पानी बचाने का सकारात्मक प्रयास किया उनको देखकर उनके घर के लोग भी पानी की कीमत को समझने लगे धीरे-धीरे डॉ देवेंद्र कुमार नागर आज पड़ोस के लोगों को भी लगातार गौतम बुध नगर में गिरते भूमिगत जल के स्तर पर चिंता व्यक्त करने लगे इसका प्रभाव यह रहा की आस पड़ोस के लोग भी पहले यदि उदाहरण के तौर पर नहाने मैं ही लगभग समरसेबल से 100 लीटर पानी की खपत करते थे वह भी अब डॉक्टर देवेंद्र कुमार नागर की प्रेरणा से में केवल बाल्टी और जग की सहायता से 10 लीटर पानी नहाने में खर्च करने लगे इससे डॉक्टर देवेंद्र कुमार नागर का हौसला इतना बड़ा की वह आसपास के गांव मैं जल चौपाल लगाकर लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने लगे लोग इसे जुड़ते गए और डॉक्टर देवेंद्र कुमार नागर गौतम बुध नगर के विद्यालयों और विश्वविद्यालय, सोसाइटी, कस्बा, नगर पालिका, विभिन्न सामाजिक संस्थाओं तथा भूगर्भ जल विभाग गौतम बुद्ध नगर के सहयोग से जल चौपाल, रैली , पोस्टर प्रतियोगिता, के द्वारा बड़े स्तर पर नवयुवकों, बड़े बुजुर्गों तथा महिला...

*UPSC इंटरव्यू में पूछा जाने वाला* *ऐसा सवाल जिसका उत्तर बहुत कम अभ्यर्थी दे पाते हैं**स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस में झंडा* *फहराने में क्या अंतर है ? तो आवो जाने,,,,,**#पहला_अंतर**15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर झंडे को नीचे से रस्सी द्वारा खींच कर ऊपर ले जाया जाता है,*फिर खोल कर फहराया जाता है*जिसे *ध्वजारोहण कहा जाता है *क्योंकि यह 15 अगस्त 1947 की ऐतिहासिक घटना को सम्मान देने हेतु किया जाता है जब प्रधानमंत्री जी ने ऐसा किया था।*संविधान में इसे अंग्रेजी में Flag Hoisting (ध्वजारोहण) कहा जाता है।**जबकि**26 जनवरी गणतंत्र दिवस के अवसर पर झंडा ऊपर ही बंधा रहता है,*जिसे खोल कर फहराया जाता है,*संविधान में इसे Flag Unfurling (झंडा फहराना) कहा जाता है।**#दूसरा_अंतर**15 अगस्त के दिन प्रधानमंत्री जो कि केंद्र सरकार के प्रमुख होते हैं वो ध्वजारोहण करते हैं,*क्योंकि स्वतंत्रता के दिन भारत का संविधान लागू नहीं हुआ था और राष्ट्रपति जो कि राष्ट्र के संवैधानिक प्रमुख होते है*उन्होंने पदभार ग्रहण नहीं किया था। *इस दिन शाम को राष्ट्रपति अपना सन्देश राष्ट्र के नाम देते हैं।**जबकि**26 जनवरी जो कि देश में संविधान लागू होने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, इस दिन संवैधानिक प्रमुख राष्ट्रपति झंडा फहराते हैं**#तीसरा_अंतर**स्वतंत्रता दिवस के दिन लाल किले से *ध्वजारोहण किया जाता है।**जबकि**गणतंत्र दिवस के दिन राजपथ पर झंडा फहराया जाता है।**आपसे आग्रह है ये अंतर अपने बच्चों को जरूर बताएं। वंदे मातरम ! 🇮🇳👏*

डॉ देवेंद्र कुमार नागर की प्रोफाइल

डॉक्टर देवेंद्र कुमार नागर दुजाना गौतम बुध नगर के मध्यम वर्गीय किसान परिवार से आते हैं इन्होंने अपनी शिक्षा किताबों और अन्य साधनों के अभाव में न पूरी की वरन पीएचडी तक प्राप्त की आज भी शिक्षा की अलख जगाए  हुए हैं और भावी पीढ़ियों और आसपास के बच्चों के लिए पुस्तक व पुस्तकालय जैसी सुविधाओं के लिए संकल्प बद्ध होकर लोगों के घरों में पुरानी या प्रयोग में न रही पुस्तकों को आदान प्रदान करने के लिए जन जागरूकता अभियान चलाए हुए हैं जिसके परिणाम भी हम सबके सामने आने लगे हैं अब तक लगभग 13000 जरूरतमंद बच्चों को लगभग 52000 पुस्तकें देकर उनका मनोबल ही नहीं बढ़ाया बल्कि पर्यावरण संरक्षण जिसमें बहुत बड़ी संख्या में पेड़ों को कटने से बचाया तथा जल संरक्षण को भी बढ़ावा दिया| डॉक्टर देवेंद्र कुमार नागर का संकल्प है कि वह अपने जीवन की अंतिम सांस तक पुस्तकों के आदान-प्रदान और जल संरक्षण के लिए स्वयं को संकल्प  बद्ध किए हुए हैं|

शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम,आँधीयों से कह दो कि औक़ात में रहें..!!!

शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम, आँधीयों से कह दो कि औक़ात में रहें..!!!

khani

जंगल में शेर शेरनी शिकार के लिये दूर तक गये अपने बच्चों को अकेला छोडकर। जब देर तक नही लौटे तो बच्चे भूख से छटपटाने लगे.  उसी समय एक बकरी आई उसे दया आई और उन बच्चों को दूध पिलाया फिर बच्चे मस्ती करने लगे. तभी शेर शेरनी आये. बकरी को देख लाल पीले होकर शेर हमला करता,  उससे पहले बच्चों ने कहा इसने हमें दूध पिलाकर बड़ा उपकार किया है नही तो हम मर जाते। अब शेर खुश हुआ और कृतज्ञता के भाव से बोला हम तुम्हारा उपकार कभी नही भूलेंगे, जाओ आजादी के साथ जंगल मे घूमो फिरो मौज करो। अब बकरी जंगल में निर्भयता के साथ रहने लगी यहाँ तक कि शेर के पीठ पर बैठकर भी कभी कभी पेडो के पत्ते खाती थी। यह दृश्य चील ने देखा तो हैरानी से बकरी को पूछा तब उसे पता चला कि उपकार का कितना महत्व है। चील ने यह सोचकर कि एक प्रयोग मैं भी करती हूँ,  चूहों के छोटे छोटे बच्चे दलदल मे फंसे थे निकलने का प्रयास करते पर कोशिश बेकार । चील ने उनको पकड पकड कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया. बच्चे भीगे थे सर्दी से कांप रहे थे तब चील ने अपने पंखों में छुपाया, बच्चों को बेहद राहत मिली. काफी समय बाद चील उडकर जाने लगी तो हैरान हो उठी च...

नशा मुक्ति समाज के लिए जागरूकता अभियान

नशा मुक्ति समाज के लिए जागरूकता अभियान चलाकर लिख रहे हैं नया अध्याय उम्मीद संस्था के संस्थापक एवं संयोजक डॉक्टर देवेंद्र कुमार नागर बताते हैं कि क्षेत्र में जब से जमीनों का मुआवजा मिलने लगा है युवाओं का रुझान नशे की तरफ होने लगा था डॉक्टर देवेंद्र कुमार नागर ने गांव में चौपाल लगाकर अब तक हजारों युवाओं को नशे की गिरफ्त से मुक्त करा चुके हैं अब वह युवा उम्मीद संस्था के सदस्य बनकर गुर्जर समाज को नशा मुक्त समाज बनाने की मुहिम में लगे हुए हैं उम्मीद संस्था से जुड़े प्रधानाचार्य जागेश कुमार जी से बात होती हैं तो वह बताते हैं कि उम्मीद संस्था विद्यालयों में जाकर बच्चों को नशे से होने वाली बीमारियों के विषय में बताते हैं और जीवन में नशा न करने के लिए सभी को शपथ दिलाते हैं उम्मीद संस्था लगभग पिछले15 वर्षों से विद्यालयों तथा गांव में अभियान के माध्यम से एक लाख लोगों को नशा न करने की शपथ दिला चुके हैं अभियान का क्षेत्र में असर यह है कि युवा नशा छोड़ कर शिक्षा के क्षेत्र में परचम लहरा रहे हैं डॉक्टर देवेंद्र कुमार नागर बताते हैं बच्चों को व्यस्त रखने के उद्देश्य से गांव में 15 वर्ष पहले 50 बच्चों ...

स्वास्थ्य दिवस

* स्वास्थ्य दिवस :*  याद रखने योग्य महत्वपूर्ण बातें:  1. बीपी: 120/80  2. पल्स: 70 - 100  3. तापमान: 36.8 - 37  4. सांस : 12-16  5. हीमोग्लोबिन: पुरुष -13.50-18  स्त्री- 11.50 - 16   6. कोलेस्ट्रॉल: 130 - 200  7. पोटेशियम: 3.50 - 5  8. सोडियम: 135 - 145  9. ट्राइग्लिसराइड्स: 220  10. शरीर में खून की मात्रा: पीसीवी 30-40%  11. शुगर लेवल: बच्चों के लिए (70-130) वयस्क: 70 - 115  12. आयरन: 8-15 मिलीग्राम  13. श्वेत रक्त कोशिकाएं WBC:  4000 - 11000  14. प्लेटलेट्स: 1,50,000 - 4,00,000  15. लाल रक्त कोशिकाएं RBC: 4.50 - 6 मिलियन.  16. कैल्शियम: 8.6 -10.3 मिलीग्राम/डीएल  17. विटामिन D3: 20 - 50 एनजी/एमएल. 18. विटामिन B12:  200 - 900 पीजी/एमएल. *वरिष्ठ यानि 40/ 50/ 60 वर्ष  वालों के लिए विशेष टिप्स:* *1- पहला सुझाव:* प्यास न लगे या जरूरत न हो तो भी हमेशा पानी पिएं, सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्याएं और उनमें से ज्यादातर शरीर में पानी की कमी से होती हैं। 2 लीटर न्यूनतम प्रति दिन. *2- दूस...

बच्चों के शैक्षिक स्तर में गुणात्मक वृद्धि कैसे करें

बच्चों के शैक्षिक स्तर में गुणात्मक वृद्धि कैसे करें?  डॉक्टर देवेंद्र कुमार गुर्जर (दुजाना) संस्थापक एवं संयोजक उम्मीद संस्था बच्चा जब पैदा होता हैतो वह कोरी स्लेट के समान होते हैं |समाज में रहकर ही वह सब कुछ सीखते हैं |समाज में रहकर ही उसे अच्छे एवं बुरे का ज्ञान होता है| बच्चा लगभग 4 वर्ष तक सबसे अधिक अपने परिवार से ही सीखता है| उसके बाद वह पास पड़ोस के बच्चों से सीखने को मिलता है| लगभग 4 वर्ष के बाद उसके स्कूलिंग शिक्षा प्रारंभ होती है|यहीं से उसका संपर्क अपनी कक्षा के छात्रों ,विद्यालय के छात्रों ,अध्यापकों तथा अन्य लोगों के साथ होता है|लगभग टीनएज तक बच्चों को अपने अच्छे या बुरे का विशेष ज्ञान नहीं होता है| वह अपने माता-पिता तथा परिवार के लोगों की तुलना में अपने मित्र मंडली की बातों का अधिक अनुसरण करते हैं|इस स्तर पर आकर अभिभावकों को अपने बच्चों के प्रति अधिक सजग रहने की आवश्यकता होती है|क्या अभिभावकों के दिमाग में  अपने बच्चों के प्रति इस प्रकार के प्रशन कभी आते हैं? वह किसके साथ खेलता है?किसके साथ घूमता है?कक्षा में उसके कैसे मित्र हैं? वह क्या पढ़ रहा है?उसके अध्यापक उ...